Leadership In Humanbeing ( इंसान के अंदर नेतृत्व )

Leadership In Humanbeing ( इंसान के अंदर नेतृत्व )

आज हम लीडरशिप पर बात करने जा रहे है , लीडरशिप करने के लिए स्ट्रांग और शक्षम इंसान की जरुरत होती है जो लोगो को उस सही दिशा मैं ले जा सके और लोगो को एक बेहतर मार्गदर्शन दिखा सके जो सही निर्णय लेने की ताकत रखता हो. हम बात करने जा रहे है एक ऐसे लीडर की जो लोगो की भीड़ से अलग सितारे की तरह हो. आप ने लीडर्स को कई बार अलग अलग जगह लीडरशिप करते देखा होगा जैसे यूनियन, कंपनी , आर्गेनाइजेशन, कॉलेज , या पोलिटिकल पार्टी मैं या किसी समाज मैं मैं लीडरशिप करते देखा होगा. आज देश मैं हालत ऐसे हो गए है की गली गली मैं आस पास लोग नेता या लीडर बने फिरते है. पहले के ज़माना कुछ और था और आज का ज़माना नई सोच और एडवांस टेक्नोलॉजी पर निर्भर करता है. हमने अपनी लाइफ मैं कई बार देखा होगा की कई बार ऐसे हालत आ जाते है की हम को भी एक लीडर बन कर डिसिशन लेना होता है जिस की असर काफी लोगो पर होने वाली होती है और उस टाइम हमे बहुत सोचना पड़ता है. लीडरशिप पर बहुत सारे लोगो ने अलग अलग आर्टिकल लिखे हुए है , जिसे पढ़ने के बाद आपने बहुत सारि जानकारी भी हाशिल करि होगी. स्टीव जॉब्स जो ऐपल कंपनी के को फाउंडर थे, आज उन की ऐपल कंपनी के लिए की गई लीडरशिप के लिए उन की कंपनी और पूरी दुनिया याद करती है. कुछ नया सोचना और कुछ नया करना ये उनका मूलमंत्र था और उसी की बदोलत वे एक स्ट्रांग बिजनेसमैन कब बन गए उन्हें पता ही नहीं चला और पूरी दुनिया उन्हें देखती ही रह गई . यही खासियत एक लीडर को सब से अलग पहचान दिलाती है. ऐसे कई महान नेता हुए और लीडर हुए जिनके किस्से और अनसुनी बाते है जो दिल को छू जाती है और हम को उन के जीवन से कुछ सिखने का मौका मिलता है.

एक अच्छा लीडर हमेशा एक विधार्थी की तरह अपने आप से सिखने की कोसिस करता रहता है.. पोलिटिकल पार्टी हो या आर्गेनाइजेशन संस्था हो ऐसे कई लीडर है जिन्हे लोग उनकी महानता उन की दरियादिली के लिए आज भी याद  किये जाते है.टाटा ग्रुप की बहुत सारी कंपनी है और टाटा ग्रुप के चैयरमेन श्री रतन टाटा है. सन 1998 मैं पैसेंजर कार मैं बिज़नेस करने का ख्याल आया और उस सपने को साकार करने के लिए रतन टाटा ने TATA INDICA CAR बड़े मेहनत से लांच की थी और वो उन का ड्रीम प्रोजेक्ट था. कुछ टाइम बाद उन्हें इस पैसेंजर कार बिज़नेस मैं बहुत बड़ा लॉस हुआ. अनुभवी लोगो ने इस कार प्रोजेक्ट मैं बहुत कमिया बताई और उन्हें सलाह दी की आप इस टाटा मोटर्स को बेच दी जिए और उस से आप के नुकसान की भरपाई भी हो जाएगी. फिर क्या था रतन टाटा ने बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की मीटिंग मैं टाटा मोटर्स को बेचने का प्रस्ताव रखा और सब लोगो ने उसे स्वीकार किया और उसी सिलसिले मैं वो USA गए और फोर्ड कंपनी के मालिक बिल फोर्ड से मिले और अपना प्रस्ताव रखा. ऐसा बताया जाता है की बिल फोर्ड ने बड़े रूखे अंदाज मैं सुनाया और कहा की “जब तुम्हे पैसेंजर कार का अनुभव ही नहीं है तो आप ने ऐसा बिज़नेस स्टार्ट क्यों किया और कहा की हम आप की इस कंपनी को खरीदकर बहुत बड़ा अहसान कर रहे है “. बस फिर क्या था उस मीटिंग के बाद उन्हें बड़ा दुःख हुआ और मीटिंग को छोड़कर कर बिना डिल किये वापस भारत आ गए. रतन टाटा ने अपने को साबित करने के लिए इंडिका v2 यानी इंडिका वर्जन 2 लांच की जिसे बहुत बड़ी सफलता मिली और बिज़नेस मैं बहुत सारे रिकार्ड्स तोड़ दिए. टाटा मोटर्स का नाम प्रमुख कार मेकिंग कंपनी मैं दर्ज होने लगा. दूसरी तरफ फोर्ड कंपनी को लैंडरोवर और जैगुआर की वजह से बहुत बड़ा नुकसान हुआ नौबत ये आई की बील फोर्ड ने लैंडरोवर और जैगुआर को बेचने का डिसिशन लिया और जब ये बात रतन टाटा तो पता चली तो रतन टाटा ने लैंडरोवर और जैगुआर को खरीदने की इच्छा व्यक्त की तो बिल फोर्ड ने कहा आप ने लैंडरोवर और जैगुआर को खरीदकर हम पर अहसान किया है.

अब हम उस लोकप्रिय नेता की बात कर रहे है जो अपने सिद्धांतो के लिए जाने जाते है और उन का नाम है अटल बिहारी बाजपाई. जब अटल बिहारी जी प्रधानमंत्री थे 1999 मैं तब NDA गठबंधन से बनी सरकार थी जिस मैं बहुत सी राजनैतिक पार्टी ने सहयोग दिया हुआ था सरकार को चलाने के लिए, जय ललिता जी की पार्टी के पास उस समय 18 संसद थे. जयललिता ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी को एक शरत पे समर्थन देने के लिए कहा और वो शरतये थी की DMK सरकार को बर्खास्त कर दिया जाये और अपना समर्थन देने के लिए वे इस मांग पर अड़ी रही. जिस पर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी जी ने साफ़ मना कर दिया और कहा की मेरी सरकार कल गिरती हो तो आज गिर जाए मुझे इस बात की परवाह नहीं पर मैं गलत नहीं करुगा. फिर क्या था जय ललिता ने सरकार में से अपना समर्थन वापस ले लिया और अविश्वाश प्रश्ताव सरकार के पास रखा जिसे सरकार संसद में विश्वाश मत हासिल ना कर पाई और अटल बिहारी वाजपयी जी की सरकार एक वोट से गिर गई.जब 1999 जब कारगिल युद्ध हुआ था तब भारत ने पाकिस्तान को उस युद्ध में हराकर दुनिया मैं अपना परचम लहराया था और दुनिया को अपनी ताकत दिखाई थी उस समय पर हमारे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी थे.  सरदार वल्लभभाई पटेल को पूरी दुनिया जानती है ये वही नेता है जिन्हो ने देश की अलग अलग रियासतों को जोड़कर एक अखंड भारत का निर्माण किया. देश की अलग अलग 520 रियासतों को जोड़कर एक अखंड भारत बनाना बहुत चुनौती भरा काम था कई राजा इस निर्णय से राजी नहीं थे और बगावत पर उतर आये थे तब सरदार वल्लभ भाई पटेल ने उन से युद्ध लड़कर भारत देश को अखंड भारत बनाया.

मुकेश अंबानी दुनिया के अमीर इंसानो मैं एक से एक है और रिलायंस इंडस्ट्रीज के MD न चैयरमेन है. इतने आमिर होने के बावजूद और उनकी रिलायंस कंपनी की खुद की अपनी आलीशान बिल्डिंग है. फिर भी मुकेश अंबानी अपनी खुद की पर्सनल ऑफिस या केबिन की बजाय वे अपने कर्मचारीओ के साथ ओपन ऑफिस मैं साथ मिलकर काम करते है यही सोच उन इंसान को बहुत आगे ले जाती है. हम ने किताब मैं पढ़ा था की कोई भी  व्यक्ति लीडर दो वजह से बनता है एक तो जनम से ही लीडर होता है और दूसरा लोगो के साथ रहकर, सोच समझकर और अपनी गलतिओ से सिख कर व्यक्ति आगे जाकर लीडर बनता है. जैसे आपने देखा होगा कोई बड़ा नेता होगा वो आगे जाकर अपने बेटे को नेता ही बनाएगा वो चाहेगा ही उसका बेटा भी मंत्री बने और कई ऐसे भी लोग है जिन्हो ने अपनी काबिलियत से लोगो में अपना हुनर दिखाकर इलेक्शन जीते है जैसे कई लोग को बड़ी पार्टिया टिकट नहीं देती फिर भी वो अपक्ष चुनाव लड़कर जीतकर दिखा देते है. आप ने जितने भी लीडर्स देखे है उन सब की लीडरशिप करने का स्टाइल अलग अलग होता है. कुछ लीडर्स ऐसे होते है जो डिसिशन लेते समय बस अपने आप की सुनते है और उनका डिसिशन फाइनल डिसिशन होता है. कुछ ऐसे भी लीडर्स होते है जो डिसिशन लेते समय सब की बातो को अच्छे से सुनते है फिर उस का फैसला लेते है. हम आशा करते है की आप हमारा यह आर्टिकल पढ़कर अच्छा लगा होगा और आप को इस आर्टिकल से कुछ नया सिखने को मिला होगा.आप हमें कमैंट्स कर के अपने व्यूज बता सकते है या सजेशन दे सकते है और कृपया ज्यादा से ज्यादा अधिक लोगो में शेयर करे जिस से लोगो मैं जानकरी हासिल हो सके.

 

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