बैंक, NPA ,और बिचारे बैंक एम्प्लाइज

बैंक, NPA ,और बिचारे बैंक एम्प्लाइज

दोस्तों आप जानते है की जब इंसान जन्म लेता है तब से लेकर जब मर जाता है तब से लगाकर तक उसे बैंक के कामकाज की जरुरत पड़ती है. आज बहुत सारि बैंक्स देश मैं काम कर रही है और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया उन सब की अपैक्स यानी उन सब की ऊपरी बैंक होती है, जो सब बैंको की मॉनिटरिंग का कामकाज करती है. देश मैं सरकारी बैंक,प्राइवेट बैंक , सरकारी ग्रामीण बैंक और कोआपरेटिव बैंक ये सब बैंक मिलकर ऐसी बहुत सारि अलग अलग नामो से बैंक है. आज बैंक मैं बहुत सारे रिफॉर्म्स यानी बदलाव आये है, यानी अब डिजिटल बैंक हो गई है. अब लोग घर पर बैठे बैठे बैंकिंग सेवा ओ का लाभ मिल रहा है. जैसे नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग जैसी सुविधा से लोग आसानी से अपना बैंक स्टेटमेंट देख सकते है और दूसरे अकाउंट मैं भी पैसे को भेज सकते है. सब जानते है की बैंक क्या काम करती है, जैसे की नॉर्मली बैंक का काम पैसा लेना और देना होता है. यानी जब कोई कस्टमर बैंक मैं पैसे जमा करने आये तो उसे स्वीकार करना और जब कोई कस्टमर पैसे निकालने आये तो स्लिप से विड्रॉल कर के पैसे देना होता है. अब बैंक का काम काज पहले से बहुत ज्यादा बढ़ गया है और देर देर तक रुक कर काम करना पड़ रहा है. आज देखे तो बैंको मैं भी आपस में कम्पटीशन देखने को मिल रही है, बैंक कर्मचारीओ पे अच्छा परफॉरमेंस और अच्छा रिजल्ट दिखाने के लिए भी उनके कामकाज पर दबाव बढ़ गया है,हम सब जानते है की सरकार के बहुत सारे काम डॉयरेक्ट बैंक से जुड़े होते है या बैंक से जोड़ दिए जाते है. इस बात से पता चलता है की जो बैंक एम्प्लाइज है उन पर सब से ज्यादा असर देखने को मिलती है. हम जानते है की रिज़र्व बैंक सब बैंको की अपेक्ष बैंक होती है और उस के बाद SBI को लीड बैंक माना जाता है. वर्ल्ड बैंक और IMF जैसी इंटरनेशनल बैंक, इंटरनेशनल आर्गेनाईजेशन भी है जो बहुत कम इंटरेस्ट रेट पर सब देशो को उन की जरूरियात के हिसाब से लोन देती है और हर देश का प्रोग्रेस रिपोर्ट्स भी चेक करती है और जरुरी गाइडलाइन्स भी रिलीज़ भी करती है.

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हम सब जानते है की देश की इकॉनमी और इन्फ्लेशन बैंक के परफॉरमेंस पर निर्भर करता है. जिस देश में बैंक का ग्रोथ रेट जितना अच्छा होता है , उतना ही फायदा देश की GDP और देश की इकॉनमी को भी मिलता है. देश की मनी कण्ट्रोल पालिसी भी बैंक से होकर ही सरु होती है इस से समज सकते है की बैंक देश की लाइफ लाइन सिस्टम बन चुकी है. जब जब देश मैं बैंको की स्ट्राइक होती है उस की असर पुरे देश मैं दिखने को मिलती है मानो जैसे देश रुक सा जाता है और हज़ारो करोडो का उस समय पर देश को नुक्सान होता है. आज हम देख रहे है की गवर्नमेंट बैंक और प्राइवेट बैंको के बिच बिज़नेस को लेकर कम्पटीशन देखने को मिल रही है और उस का असर बैंको के बिज़नेस पर भी दिख रहा है. आज गवर्नमेंट उदारीकरण पालिसी अपना रही है उस की असर बैंक और पब्लिक मैं भी देखने को मिल रही है. जैसे बैंक मुद्रा स्कीम के तहत लोगो को लोन दे ऐसा गवर्नमेंट चाहती है जिस से बैंक को लॉस हो सकता है क्यों की मुद्रा लोन मैं किसी भी गेरेँटर व्यक्ति की जरूर नहीं होती. सरकार चाहती है की अपने देश का हर सिटिज़न आत्म निर्भर बने और आगे चल कर वो अपनी फॅमिली का विकास करे और अपनी फॅमिली को आने वाली मुसीबतो से सुरक्षित कर सके. इस के लिए बैंक एजुकेशन लोन, बिज़नेस के लिए लोन, मकान के लिए हाउसिंग लोन, पर्सनल लोन, गोल्ड लोन, व्हीकल लोन, फार्मर के लिए KCC लोन, मुद्रा लोन यानी हर टाइप के लोगो के लिए अलग अलग लोन की व्यवस्था करती हे . जब बैंक लोन देती है उन पैसो को आपने सही से उपयोग नहीं किया तो उस की असर बैंक पर भी होती है.

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अब बात ये आती है जब बैंक लोगो को लोन तो देती है पर बैंक को प्रॉफिट कैसे होता है और बैंक क्या क्या करती है इस के लिए ?, जैसे की सब जानते है लोग अपनी छोटी छोटी सेविंग्स जमा कराने के लिए बैंक में जाते है और वो पैसे बैंक के पास ऐसे ही बिना उपयोग किये जमा रखे होते है और उन पैसो का सही से उपयोग को इस लिए लोगो के विकास और उनकी जरूरियात के हिसाब से उन सही व्यक्ति को लोन के रूप मैं देती है. बैंक ने लोन पर जो व्याज दर नक्की किये होते है उतना व्याज हर महीने लोन अकाउंट में से चार्ज करती है जिस से बैंक को फायदा होता है. बैंक ने जब किसी को लोन दी होती है और वो व्यक्ति लोन के पैसे भरने में डिफॉल्टर साबित होता है तो बैंक को लॉस होता है और बैंक का NPA ( नॉन परफार्मिंग एसेट्स ) बढ़ जाता है और उस की असर देश पे भी होती है. आज हम जानते है की बड़ी बड़ी बैंको का NPA लेवल बहुत बढ़ गया है क्यों की बड़ी बड़ी कंपनियों को जो हज़ारो करोडो रुपये की लोन दी है वे उन्हें भरने मैं अपने आप को डिफॉल्टर डिक्लेर कर देती है. जैसे की बैंक बड़ी बड़ी कंपनियों को हज़ारो करोडो रुपये की लोन देती है और वो पैसे वापस नाये तो सोचिये उस की असर पुरे बैंक के बिज़नेस पर कितनी बुरी गिरेगी. जब बैंक मैं और उनकी शाखा ओ मैं NPA ( नॉन परफार्मिंग एसेट्स ) बढ़ जाता है तब NPA को कम करने के लिए ब्रांच मैनेजर पर बहुत प्रेशर किया जाता है. ज्यादातर बैंक मीटिंग्स मैं ब्रांच मैनेजर को जीरो NPA ब्रांच करने के लिए कहा जाता है और साथ मैं लोन टार्गेट्स, इन्शुरन्स टार्गेट्स, कासा टार्गेट्स, गवर्नमेंट पालिसी न स्कीम्स जैसे अटल पेंशन योजना, आधार सीडिंग कैंपेन इन सब मैं पब्लिक पार्टिसिपेट करने जो कहा जाता है और के रोज फ़ोन कर के ईमेल पर रिपोर्ट्स लिए जाते है. जो लोग बैंक मैं काम करते है अच्छे से जानते है की क्या हालत हो गए है अब बैंको को देर देर तक बैठकर काम करने के बाद भी काम हमेशा पेंडिंग ही पड़ा होता है. लोग बैंक कर्मचारी की इज़्ज़त तो बहुत करते है पर वो बैंक कर्मचारी ही जनता है उसे ऑलराउंडर की तरह सब कामो को देखना होता है.

 

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हम सब ने कुछ साल मैं देखा है की जब गवर्नमेंट ने जन धन बैंक अकाउंट ओपनिंग स्कीम लांच की थी और उस के बाद डिमॉनेटिज़ेशन (विमुद्रीकरण) ऑफ़ नोट्स पालिसी लांच की थी उस की असर पुरे भारत के सब बैंको पर देखने को मिली थी. आप ने न्यूज़ मैं देखा होगा की बैंक मैं अभी के समय बैंक स्टाफ की अछत होने के बावजूद उन सब बैंक कर्मचारियों ने साथ मिलकर बहुत अच्छे से काम किया और गवर्नमेंट की जन धन योजना और डिमॉनेटिज़ेशन (विमुद्रीकरण) ऑफ़ नोट्स करेंसी जैसी योजनाओ को सफल बनाया और देश मजबूत बना की राह पर काम को पूरा किया. जैसे आर्मी के जवान देश की बॉर्डर पर तैनात हो कर देश की सरहदो की सुरक्षा करते है बिलकुल वैसे ही बैंक के कर्मचारी देश की जनता के पैसो की सुरक्षा कर जनता के डिपाजिट को सुरक्षित रखते है. कई बार ऐसा होता है सरकार बैंक यूनियन की मांगो को स्वीकार करने से मना कर देती है तब बैंक यूनियन बैंक एम्प्लाइज को बैंक स्ट्राइक के लिए कॉल देता है और अपनी मांगो को मनवाने के लिए बैंक स्ट्राइक की जाती है. जब बैंक कर्मचारी बैंक की हड़ताल वाले दिन स्ट्राइक पर जाते है तब उस दिन का पगार उन की सैलरी मैं से कट कर दिया जाता है और उन्हें उस दिन का नुकसान भी झेलना पड़ता है.

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आप सब जानते है की बैंकिंग इंडस्ट्री देश की बड़ी सर्विस इंडस्ट्री में से एक हे और आज बैंक और बेहतर बनाने के लिए नई टेक्नोलॉजी का अच्छे से उपयोग किया जा रहा है, सरकार की तरफ से कैशलेस और डिजिटल बैंकिंग पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा हे. अब सरकार को ऐसे डिसीजन लेने चाहिए जो देश के डेवलपमेंट में मुख्य रोल को बेहतर तरीके से निभा सके. ऐसे तो गवर्नमेंट के अपने खुद के फाइनेंसियल अडवाइसर होते है जो गवर्नमेंट को सजेसन देते रहते है, पर हमारे भी कुछ ऐसे सजेसन और टिप्स हे जो बैंक के रिफॉर्म्स में काम आ सकते हे.

  1. बैंक पर NPA को कम करने के लिए बहुत प्रेशर होता हे और ज्यादातर बैंक मीटिंग में मैनेजर पर भी बहुत प्रेशर बनाया जाता है, सरकार को बैंको के हित के लिए ऐसा कानून बना चाहिए जिस का असर कुछ दिन में दिख ने लगे जैसे जो लोग बैंक के NPA लोन अकाउंट होल्डर हे उन्हें उन के घर पर 3 बार नोटिस भेजना चाहिए और फिर भी जो व्यक्ति लोन अकाउंट में लोन नहीं भरता उन्हें सीधा 15 दिन की जेल होनी चाहिए ऐसा कायदा बनाना चाहिए फिर उस का असर तुरंत दिखने लगेगा, देश में सब बैंको का NPA कम हो जायेगा और बैंको को भी इस का बहुत फायदा मिलेगा.
  2. आज देश में पब्लिक सेक्टर बैंक हो या RRB बैंक इन सब बेंको में NPA के लिए टॉप मैनेजमेंट भी जवाबदार हे क्यों की करोडो अरबो रुपये का लोन बड़ी बड़ी कंपनियों को देना बैंक मैनेजमेंट के हाथ में होता है पर वे नेताओ के दबाव के चलते उन बड़ी बड़ी कंपनियों को लोन पास कर देते हे और जब कंपनी लोन का पैसा भरने में फेल हो जाती है तो लोन अकॉउंट NPA में आ जाता हे. बैंक शाखा पर भी बैंक एडवांस बढाने के लिए मैनेजरों को कहा जाता हे जिस के चलते कई लोगो को लोन बाँट दिए जाते है और कुछ लोन अकाउंट में पैसा आता है और कुछ में नई आता पैसा.
  3. जिन जिन लोगो ने बैंक से लोन ली हे और वो रेगुलर बैंक के लोन अकाउंट में पैसा नहीं भरते ऐसे NPA खाताधारकों की लिस्ट तैयार करनी चाहिए और उन लिस्ट को न्यूज़ पेपर में छपवा देनी चाहिए फिर देखना जब लोग उनका नाम न्यूज़ पेपर में पढ़ेंगे और पुरे समाज में बात पता चलेगी तो बदनामी के दर से लोग लोन अकॉउंट में रेगुलर पैसा भरने लगेंगे, इंसान को समाज में उसकी इज़्ज़त का डर सब से ज्यादा होता हे.
  4. देश में नेसनलाइस बैंको के साथ साथ रीजनल रूरल बैंको का भी मर्जर कर देना चाहिए जैसे देश के हर एक राज्य में एक रीजनल रूरल बैंक बनानी चाहिए और ग्रामीण बैंको भी एडवांस टेक्नोलॉजी से सज्ज बनानी चाहिए जैसे अपना खुद का अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर, उनके अपने खुद के एटीएम मशीन और बैंकिंग इ-लॉबी जैसी सुविधा इन सब बातो पर सरकार को ध्यान देना चाहिए.
  5. ऐसा कहा कहा जाता है ” एम्प्लाइज आर एसेट्स ऑफ थे कंपनी” यानी एम्प्लाइज कंपनी की मिलकत होती है. अगर आप एम्प्लाइज को अच्छे से ध्यान देंगे तो एम्पलॉईस भी आप की कम्पनी का अच्छे से काम कर पाएंगे. आज ज्यादा काम काज के वजह से एम्पलॉईस बहुत सी हेल्थ रिलेटेड प्रोब्लेम्स फेस कर रहे है इस कदम की और आगे बढ़ते हुए फ्लेक्सिबल (फ्लेक्सिबल) एंड रिलैक्स वर्किंग पालिसी पर ध्यान देना चाहिए और बैंक शाखा में कितने स्टाफ की जरुरत है उस पर ध्यान देना चाहिए और उस हिसाब से नई भर्ती पे ध्यान देना चाहिए.
  6. कुछ अलग अलग देशो में NPA डिफॉल्टरों के लिए कानून व्यवस्था बनाई गए है जैसे चीन में कोई व्यक्ति लोन अकाउंट डिफॉल्टर हे और वो बैंक के पैसे नहीं भरता तो उस व्यक्ति के घर के बिजली और पानी के कनेक्शन को काट दिया जाता हे और उसे रेल या हवाई जहाज से यात्रा करने पर से भी पाबन्दी लगा दी जाती हे और उसका सरकार और वहां की बेंको दोनों को होता है. कुछ देश में तो जो लोन अकॉउंट के पैसे न दे तो उसे फांसी की सजा भी सुनाई जाती हे,अब हमारी सरकार को भी जागृत हो कर कुछ कड़क रूल बना ने होंगे.

दोस्तों मैंने जो ये आर्टिकल लिखा है बहुत सारी बातो को ध्यान में रख कर लिखा है और जो सच हे उनके आधार पर सब लिखा गया हे. आप की फॅमिली या आपके फ्रेंड्स जो बैंक में जॉब करते हे उनसे आप उनका एक्सपीरियंस पूछना और मेरे आर्टिकल से मैच करना, फिर आप को लगेगा की हम सही हे. आप को मेरा ये आर्टिकल अच्छा लगा हो तो आप उन्हें लोगो में ज्यादा से ज्यादा शेयर करे और आप कमैंट्स कर के आप अपनी राय या सजेशन हमें दे सकते हे जिस से हम और अच्छे से लिख सके. जितने भी बैंक एम्पलॉईस हे देश जनता उन्हें देश दूसरा सिपाही और अपना आदर्श मानती है.

 

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