मृत्यु जिंदगी का भयानक सच !

मृत्यु जिंदगी का भयानक सच !

मृत्यु एक एक ऐसा भयानक सच है जिसे कोईनहीं बदल सकता सब को एक ना एक दिन इस दुनिया को छोड़कर जाना है. कई बड़े बड़े राजा, महाराजा, और शहंशाह हुए जिन्होंने पूरी दुनिया को हासिल कर कब्जे ले लिया पर मृत्यु से पीछा ना छुड़ा सके . कई राजा ओ ने आजीवन अमर रहने के लिए अमरत्व की दवाई को ढूँढना सरु किया पर इस दुनिया में कही ना मिली. कोई भी इंसान हो जब उसे मौत आती है तब डर सबको लगता है. जब कोई इंसान मर जाता है और उसकी आत्मा बहार निकल कर जब उस के मृत शरीर को देखती है तो यही सोचती है पूरी जिंदगी मैं मैंने अपने लिए क्या किया और मैं अपने आप के लिए कुछ भी न कर सका और देखकर विलाप करने लगती है. हम सब ने आस पास कई बार देखा होगा की लोग मकान,जमीन मिलकत, और पैसो के लिए आपस में लड़ते रहते है और जब मार जुट कर हासिल भी कर लेते है पर जब मोत आती है तब सब कुछ छोड़कर किसी और परलोक मैं चले जाते है और सब कुछ यही पर धरा के धरा रह जाता है. हम अपनी पूरी जिंदगी मकान, मिलकत और पैसो के पीछे भागकर अपनी जिंदगी को कब पूरा कर देते है हमें खुद को भी पता नहीं चल पाता. हम ने अपनी जिंदगी मैं कई ऐसे लोगो को देखा होगा जो एक एक पैसा जोड़ कर खूब बड़ा बैंक बैलेंस तो बना लेते है पर अपनी ख़राब आदतों के चलते वे अपने आप पर पैसा खर्च करने से भी कतराते है और जब उन की मौत हो जाती है फिर वैसे के वैसा ही सब छोड़कर चले जाते है और जब उनकी आत्मा अपने मृत शरीर को देखती है और कहती है की में पूरी ज़िंदगी एक एक पाई जोड़कर बहुत सारा पैसा तो जमा कर किया पर अपनी आदतों की वजह से अपने आप पर भी खर्च ना कर सका और ना अपने लिए कुछ कर सका और नाही किसी इंसान के काम आ सका. हम अपने जीवन मैं खाली हाथ आते है और खाली हाथ चले जाते है यही सत्य जीवन में कुदरत का नियम है जिसे किसी को तोड़ने की अनुमति नई है.

भगवान ने हमें इंसानी रूप मैं जन्म इस लिए दिया है की हम किसी इंसान के काम आ सके और मुसीबत मैं हम किसी की सहायता कर सके. जैसे एक पथ्तर होता है वो भी मकान बना ने के काम मैं आता जाता है और हम यही सोचते है की ये क्या काम आएगा हमारे ? आखिर हम सब को भी एक दिन मिटटी मैं मिल जाना है , कुछ लेकर नहीं आये थे और कुछ लेकर नहीं जायेगे बस लोगो दिलो मैं बनाया हुआ प्यार छोड़ जायेगे. हम कई बार जो अच्छा इंसान मर जाता है उसे हज़ारो बार याद करते है और बोलते है बहुत अच्छा था कभी किसी के लिए बुरा नहीं सोचा और हमेशा सब की मदद के आगे खड़ा रहता था , पर जब कोई ऐसा इंसान मर जाता हे जिसे सब गाली देते है तब लोग यही बोलते है अच्छा हुआ मर गया कुछ काम मैं नहीं आता था. हम मानवजात मैं एक बुरी आदत यह हे की हम लोगो की बुराई करने में लग जाते हे और कोई हम से आगे निकल जाता है तब हम जलन सी फील करने लग जाते है. हम रोज देखते है लोग कैंसर से, अकस्मात से ,सुसाइड मैं, और टेंशन से हार्ट अटैक से मर जाते है, और जो लोग  मर जाते है वे कई बार हम को सपने मैं दिखाई देते है. कहते है किसी की इच्छा अधूरी रह जाती है तो वे आत्मा बनकरभटकते रहते है या फिर कई लोग उन आत्मा ओ के मोक्ष के लिए पूजा पाठ भी करवाते है. पर इस के पीछे सत्य क्या है ? आज तक कोई ना जान सका और नाही समाज पाया. कई ऐसे भी किस्से न्यूज़ में देखे और सुने है की किसी व्यक्ति को यमराज के दूत रात को उठाकर अपने साथ यमलोग लेकर जाते हे और जब उस इंसान के जीवन के हिसाब का चोपड़ा चित्रगुप्त पढ़ रहे होते हे तब उन्हें अपनी भूल समाज में आती हे की लाना किसी और इंसान को था पर गलती से यम के दूत किसी और को लेकर आये हे जिस की आयु का जीवन अभी बाकी हे और चित्रगुप्त जल्दी जल्दी कुछ समाज पाए उस आदमी को ऊपर से निचे पृथ्वी की और उस इंसान के घर फेंक देते हे और वो इंसान जब सुबह उठता हे तो अपने साथ गठित पूरी कहानी अपने परिवारजनों को विस्तार से बताता हे

हमे कई बार ऐसा होने लगता है की जब हम सोते होते है और अपने बेड पर से उठने की बहुत कोसिस करते है फिर भी उठ नहीं पाते और उस टाइम हमारे हाथ और पैर काम करना बंध हो जाते है और हम ऐसे ही बिस्तर पर पड़े रहते है कुछ समय और बाद में सब ठीक होने लगता है उसे विज्ञानं की भाषा पेरालल बॉडी डेड के नाम से भी जाना जाता है. ऐक सेठ जी होते है और वे पुरे दिन रात पैसा कमाने में लगे रहते है और वे अपने आस पास क्या हो रहा है उसे देखने का भी समय नहीं मिलता बस ऐक शहर से दूसरे शहर बिज़नेस के लिए फिरते रहते है और ऐसा भी समय आता है की उन की मेहनत रंग लाती हे और अपनी जिंदगी में इतने सारे पैसे जमा कर लिए होते है की उन की साथ पुस्ते भी बिना काम करे अपना अच्छे से गुजरा कर सकती है. अब उन के ऊपर जाने का टाइम आ गया और यमराज महाराज रात में सेठ जी के घर पहुंच जाते है अपने साथ यमलोक ले जाने के लिए और सेठ जी को नींद में से उठाते है. यमराज जी बोलते है सेठ जी उठिये आप का ऊपर जाने का समय आ गया है चलो. सेठ जी पूछते है तुम कोन हो और क्यों आये हो.यमराज बोलते हे में यम हु यमलोग का राजा आप को अपने साथ यमलोग लेजाने आया हु आप का ऊपर जाने का समय आ गया हे आपकी मृत्यु निश्चित हे और ऊपर जाकर आपके जीवन का चोपड़े में हिसाब किताब करना हे. सेठ जी बोलते है हे यमराज जी आप 50 लाख रुपये ले लो और मुझे 2 महीने तक और जीने दो. यमराज जोर जोर से हसते है और बोलते है की इन रुपियो को मेरे लिए कोई मोल (किंमत) नहीं है और आपका पैसा वहा हमारे किसी काम का नहीं हे. सेठ जी बोलते है आप मेरी पूरी ज़मीन और मिलकत सब ले लो मुझे 10 दिन अच्छे से जीने दो फिर भी यमराज मना कर देते है और खींचते हुए अपने साथ ले जाते है और सेठ जी बोलते है में पूरी जिंदगी पैसो के पीछे भागता रहा और अपने लिए कुछ ना कर सका और मेरी आने वाली पेढ़ी उन पैसो को लुटाएगी काश में जिंदगी का असली मतलब को अच्छे से समजा होता तो आज ऐसा दिन ना आता.

हम इंसान भगवान से ज्यादा इंसानो पर भरोसा करते हे और उन से उम्मीद रखते हे, जब हम हार जाते हे तब हम भगवान की शरण में जाते हे इस वजह से हम दुखी होते हे हमे अपने भगवान पे भसोसा रखना चाहिए जिस ने हमे इस दुनिया में भेजा हे वही हमे रास्ता बताएगा. हम इंसान की डोर उस ऊपर वाले के हाथ में हे जब तक उन ऊपर वाले के हाथ में हमारी डोर हे हम सही सलामत हे और जिस दिन उस ऊपर वाले ने अपनी डोर खिचलि उस दिन हम भी उनके साथ इस दुनिया से दूर हो जायेगे. उस भगवान के बिना तो एक पत्ता भी नहीं हिलता हम आखिर इंसान हे इस लिए उन पर भरोसा रखिये. इस बात पर से एक कहानी बताता हु यकीनन आप को पसंद आएगी.एक व्यक्ति बहुत नास्तिक था उसको भगवान पर कदापि विश्वास नहीं होता था और हमेशा अपनी मस्ती में मस्त रहता था. हमेशा पूजा पाठ और मंदिरो से दूर रहता था और बोलता रहता यदि भगवान हे तो मेरे से आकर बात करे मेरी बहुत सारी फरियादें उन से हे. ऐसे ही उस के दिन बीत ते गए और वो एक दिन अपनी ऑफिस से घर के लिए आ रहा था और उस का रस्ते में अचानक एक्सीडेंट हो जाता हे वो बहुत उठ ने की कोसिस करता हे पर उठ नहीं पाता और लोग उसकी मदद करने के बजाय  ये कलयुग का इंसान पुलिस की पूछताछ और अपना कीमती समय कोन ख़राब करे ये सोच कर वहां से देखते देखते चले जाते हे. फिर वो नास्तिक इंसान ने ना चाहते हुए ऊपरी मन से भगवान को याद किया और बोला ” प्रभु में तड़प रहा हु मुज पर दया रखे और बचाइए फिर क्या था? बस इतना कहते ही वहा से एक ठेले वाला ठेला लेकर गुजर रहा था और उस ने उस नास्तिक इंसान को उठाया और ठेले में दाल कर अस्पताल ले गया और उस नास्तिक इंसान के घरजनो को फ़ोन कर के अस्पताल बुलाया और सब परिवार वाले भागे दौड़े अस्पताल पहुंचे और उस व्यक्ति का खूब धन्यवाद किया. वो ठेले वाला वहा से अस्पताल से निकल रहा था की उस नास्तिक इंसान के परिवारजनो ने उस ठेले वाले के घर का एड्रेस माँगा और फ़ोन नंबर माँगा और कहा की जब हमारा बेटा ठीक हो जायेगा तो हम उस के साथ आप के घर पे जरूर आएंगे, आप से मिलने के लिए उस ठेले वाले ने कहा ठीक हे और हाथ जोड़कर वहा से चला गया. जब वो नास्तिक इंसान कुछ दिन बाद ठीक हो जाता हे और अपने घर वालो के साथ उस व्यक्ति को मिलने उस के घर के तरफ निकल पड़ता हे उन्हें मिलने के लिए. पहले वो फ़ोन करता हे पर फ़ोन नेटवर्क सेत्र बहार हे ऐसा मेसेज आता हे, भगवान का नेटवर्क VIP नेटवर्क होता हे और बहुत कम लोगो को मिलता हे. फिर वे बताये अड्रेस पे मंदिर के पास भवन पर पहुंच जाते हे और पास बैठे पुजारी से पूछते हे पुजारी जी ये बाके बिहारी जी यहाँ रहते हे पुजारी ने हाथ जोड़कर बाके बिहारी जी मूर्ति की तरह इसारा किया और कहा यहाँ पर एक ही बाके बिहारी जी हे जो आप के सामने खड़े हे और अड्रेस चेक करते हे तो अड्रेस वही मंदिर का निकलता हे और सब लोग अचंभित हो जाते हे और मंदिर में हाथ जोड़कर जब वहा से निकलते हे तो उनकी निगाह एक बोर्ड पर पड़ती है उसमे एक वाक्य लिखा दिखता है – कि “इंसान ही इंसान के काम आता है, उस से प्रेम करते रहो मै तो तुम्हे स्वयं मिल जाऊंगा. हम आशा करते हे की आप को हमारा ये आर्टिकल पसंद आएगा आप अपने कमेंट्स कर के अपने सजेसन दे सकते हे और ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करे और जानकारी पहुचाये.

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